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जिंदगी है वो मेरी

यूँ तो वो जिंदगी है मेरी , पर जिंदगी भर साथ ना रहेगी , बिछड़ जाएगी किसी रोज मुझसे , और मैं अकेला रह जाऊंगा उसकी यादो की चादर ओढे !! हर रोज की तरह सुबह तो होगी , पर मैं सोया रहूँगा बेचैन , कोई होगा ना तब मुझे जगाने वाला , और ना कोई उठ जाने की ज़िद्द ही करेगा तब !! कितनी राते भूखा ही सो जाऊंगा मैं , कितनी राते रोता ही रह जाऊंगा मैं , कोई होगा ना तब मानाने वाला मुझे , और ना कोई अपनी कसम देकर , मुझसे अपनी बाते ही मनवायेगा !! मैं शायद जिन्दा तो रहूँगा , शायद साँसे भी चलती भी रहेंगी , पर जिंदगी बेदर्द सी चुभती ही रहेगी , और हर वक्त दम मेरा घुटता ही रहेगा !! वो मुझे भुलायेगी तो नहीं कभी , पर शायद फिर याद भी ना करेगी , एक अलग नाव पर होकर वो सवार , एक नया जहां जो बसाएगी !!  कोई रूठेगा जो कभी उससे , वो बेचैन रहेगी उसे मानाने को , माना वो मान भी जायेगा पल भर में , पर फिर भी उसे कहाँ वो चैन आएगा !! वो तब मेरा चेहरा शायद उसमे पायेगी , और सिमट जाएगी उसकी बाहों में रोते हूवे , पर दर्द सीने में ही रहेगा , कम न होगा , वो ...

रुसवाई

परछाई मेरी संग हैं हर पल तेरे ; मैं ना भी रह सका तो क्या गल हैं  तू समझ ना सकेगी इस बात को; पर मजबूर था मैं भी कितना । सपने तेरे आज भी पलकों पर सजाये बैठा हूँ,  कल ही की तरह ; दुवाओ में आज भी मांगता हूँ तुझे,  हर बार की तरह ; मैं बेवफा कहलाया हूँ, दुनिया की नजरो में भले ही ; पर  बेवफा नहीं तू जाने है ये सब ।।  सोचा तो मैंने भी ना था कभी;  की रुसवाई आएगी कभी हमारे बीच । पर किसे पता कल होना क्या है; कब साथ है कोई, और कब बिछड़ जाना है । बस एक गिला है जिंदगी से;  जिससे किया खुशियो का वादा था उसे ही गम दे गया, जानता हूँ कितना तड़पी है तू,  और मैं .......... तुझे तड़पता छोड़ गया ।।। फिर मिले कभी जिंदगी की राहो में ; अपनी सफाई पेस करूंगा तब तेरे सामने ; और सायद तू समझेगी मुझे, जैसे तू आज... । पर डर है तो बस एक बात का, की मैं पागल ना हो जाऊ उस कल के इन्तजार मे ; और मर ना जाऊ कही बिछड़ के तुझसे ।।।। । ... पंकज अधिकारी  ... ।

~ तेरी दीवानी ~

बूंदे बरस जाओ आज झम-झम, की दिल भीग जान चाहता है,  चाहत के बारिश मे तेरी; ऐ पवन तू यूंही चली चल, की उड़ने को व्याकुल हॅू मैं,  तेरे चाहत के ख्वाब लिये ! ऐ जमीं तू भी अपनी तृष्णा बुझा ले, मैं तो मिल आई हॅू सजना से अपने, जो प्यासी थी मैं सदियों से, आज जाके कहीं दरिया मिला है, डूब जाउ अब कुछ ऐसे इस्में, जैसे सागर से मिले हो नदिया ! चॅदा तेरी चॅादनी मे आज ये नूर क्युं है ज्यादा, मैं तो सजना मिलो आई हॅू तो, चहक रही हॅू, तू क्युं यूं चमक राहा हैं, तेरी ही चॅादनी कुछ बड़ी हैं आज, या मैं ही बुद्धू, पगला सी गई हॅू सजना मिल ! क्युं ये पंक्षी भी इतना चहकते है, पहले कभी तो ऐसा ना था, सूरज कब से शीतलता देने लगा, इतनी तपन थी जो, वो सब गई कहां, पुष्पों पे कलरव करते भवरें, गुन-गुन गुनगुनाते हो जैसे, मद्धम, सुगन्धित, शीतल सी महक, बिखरी है जर्रे-जर्रे मे आज ! ऐ आसमा तू झूक गया है क्युं, मैं तो सजना संग तेरी छांव मै बैठूंगी, ठंडी छांव, चॅाद-तारो भरा तेरा आँचल होगा, और मैं सजना की बॅाहों मे ! गरम सांसो की गरमी लिये, नरम बॅाहों क...

~तू मेरा सारा जहांन~

 तेरे साथ जिया हु,  तेरे लिए जिया हॅू;   तू मोहब्बत मेरी,  तू ही मेरी ज़िंदगी!   रूह की जान तुमसे ही है,   होठो की मुस्कान तुमसे ही है;   तू मेरा आसरा,  तू ही मेरी मंजिल है,   तुमसे ही ये जहांन,  तुमसे ही रोशन हैं ये समा !    तेरे साथ चला हॅू,  तेरे लिए चला हॅू;   तू अमानत मेरी,  तू ही मेर दिवानगी!   पल्को तर तू ख्वाबों सी रोशन,   चेहरे की चमक तुझसे ही है;   लबों पर तू दुवाओ की जैसे,   हाथों पर किस्मत की लकिरों सी हैं;   तुझसे ही उम्मीदें,  तुझसे ही विश्वास है !    तेरे साथ हसा हॅू,  तेरे लिए हसा हॅू,   तू बन्दगी मेरी,  तू ही मेरी आवारगी!   घटाओं मे बिजलि की तरह,   हवाओं मे खुशबु की तरह,   पत्तो मे तू बूंदों की तरह,   फुलो मे तू भवरों की तरह,   मौसम भी हैं रंगीन तुझसे,   तू ही इंद्धनुष मे रंगों की तरह,  ...